मैं सुतवँ नींद भर… मुड़सरिया बर जांघी दे आज…मैं सुतवँ नींद भर…! का रथिया मंझनिया का सांझ…मैं सुतवँ नींद भर…!! जिनगी पहाएन भुगत के उम्मर भर बूता म खट के जाए के बेरा म अब का लाज…मैं सुतवँ नींद भर…! का रथिया मंझनिया का सांझ…मैं सुतवँ नींद भर…!! दू खोली के घर नानक खेत होइस नहीं दाई लछमी मेर भेंट जीवन भर दुच्छा रहिगे मोर हाँथ…मैं सुतवँ नींद भर…! का रथिया मंझनिया का सांझ मैं…सुतवँ नींद भर…!! धोखा कपट लबारी ले बाँचेवँ झन पातिन कोनों दुख यही सोचेवँ जम्मे पीरा जुड़ावय मोर साथ…मैं सुतवँ नींद भर…! का रथिया मंझनिया का सांझ…मैं सुतवँ नींद भर…!! कवि - …
बन जा मया के अंजरी मैं तोर बिन भाँठा के मछरी आ मोला पानी पीया दे…! बन जा मया के अंजरी आ मोला पानी पीया दे…!! मैं हर पियासा मरुस्थल तयँ प्रेम के ऊँचा हिमालय तोर मन मया के ओगरा मोर हिरदय सुन्ना सिवालय मोर बर तयँ जल-थल बदरी आ मोला पानी पीया दे…! बन जा मया के अंजरी आ मोला पानी पीया दे…!! मेला ठेला न बजार हाट न ठाठ-बाट फेसन भावय न संगी साथी सुहावयँ बस तोरेच सुरता आवय तोर अंग-अंग कलसा गगरी आ मोला पानी पीया दे…! बन जा मया के अंजरी आ मोला पानी पीया दे…!! मयँ बीस बछर के पियासा तोला देख के जागय आसा हम जनम-जनम के जोड़ी एहू जनम मिलय झन निरासा मोर …
मैं सीधा छत्तीसगढ़िया…!! मैं सीधा छत्तीसगढ़िया अउ का चाही…! चलत हे गुजारा बढ़िया अउ का चाही…!! माटी के हे घर दूरा खपरा के छानही गरमी बरसात पागा धोती अउ पनही रांधे बर तेलाई हँड़िया अउ का चाही…! चलत हे गुजारा बढ़िया अउ का चाही…!! बीपीएल के कारड म महिना भर के रासन अब तो दारू घलो बेचत हे हमर सासन दुख, न बिहाने रथिया अउ का चाही…! चलत हे गुजारा बढ़िया अउ का चाही…!! मेहनत मजूरी करके ओनहा बिसाथौं लईकन ल सरकारी इसकुल म पड़हाथौं ऊँहों चलथे सुरपुटसैया अउ का चाही…! चलत हे गुजारा बढ़िया अउ का चाही…!! गाय भेंड़ी छेरी पसुपालन पिछुआगे खेती-खार म बस्ती बस गे…
छुवाछुत के सराप मरकी के पानी पीके, अइसे का पाप कर देंव, जिनगी ल मोर छीन के, मोर तय नास करदे। पियास लगीस त पानी पीके, अपन पियास जुड़ातेव, छुवाछुत के ग्यान मोला, तय आघु ले नइ बताते। तंहू मनखे के जात हस,अउ महुँ लईका जान के, मरकी के पानी ले, सुखत टोटा(गला) के पियास जुड़ातेव। मैं का जानतेव, पियास जुड़ाए के छोटे से भूल, आजे मोर जिनगी के, काल हो जतीस। छोट जाति के मनखे होके,मरकी ले पानी पिये ले, मोर जिनगी के नास हो जातिस। अनिल कुमार पाली तारबाहर बिलासपुर
लईका के हत्या माटी कोखरो जात नइ पूछे, सब ल एही माटी म मिलाथे। महतारी पोटारे छाती ले जइसे, तइसन अपन कोरा म मनखे ल सुताथे। एही माटी के बने घर-कुरिया मरकी-घड़ा, सब्बो मनखे के प्यास बुझाथे। लईका होए के सियान बिन जाति पूछे, सब ल अपन कोरा म बराबर लुकाथे। ए माटी के बने मनखे के काठी फेर काबर छोटे-बड़े जाति दूसर ल बताथे। प्यास लगीस त पानी पीये के सजा अपन जिनगी ल दे के लईका चुकाए। ए माटी के बने मनखे तय काबर ऊंच-निच के जात बनाए। युवा कवि साहित्यकार अनिल कुमार पाली तारबाहर बिलासपुर
लोकगीत ***************** तोर मया संग मोर मया के,गांठ परे हे बढ़िया तहूं छत्तीसगढ़ीया हस ओ,महूं छत्तीसगढ़ीया । मया पिरीत के बंधना बांधे, तॅंय हर ओ मन भरके अड़बड़ तोर सुरता सताथे, मोला ओ रही रही के मीठ मया के जाल म दोनो------ फंसे हवन रे बढ़िया तोर मया संग मोर मया के, गांठ परे हे बढ़िया। **************2*********** मॅंय गॅंवइहा छत्तीसगढ़ीया,तॅंय शहर के छोरी मॅंय हवव ओ निचट करिया,तॅंय हवस ओ गोरी मॅंय गरीब नगरिहा के बेटा----- तॅंय बड़े घर के रहइया तोर मया संग मोर मया के, गांठ परे हे बढ़िया । ***********…
🌾 धनहा सबो हरियागे रे 🌾 गूगल ले प्राप्त गरज गरज के बरसे पानी भूइंया के प्यास बुझागे रे सुख्खा परे सब खेतखार ह धनहा सबो हरियागे रे। पिंयर पिंयर दिखे धान ह भूइया सबो हरियागे पुर्वइया संग झूमय नाचय रूख राई मन मतागे नदिया नरवा बोहावत हवय तरिया घलो अघागे रे सुख्खा परे सब खेतखार ह धनहा सबो हरियागे रे। नाँगर जोतत जाँगर टोरे दुख पीरा बिसरागे किसान के मन कुलकत हे मन म खुशी समागे कोला बारी कोठी डोली दुख के दिन भगागे रे सुख्खा परे सब खेतखार ह धनहा सबो हरियागे रे। छंईया भूइया धान कटोरा सुख के दिन फेर आगे सुआ ददरिया कर…
आथे पुरखा के सुरता 👏👏👏👏👏👏👏👏 आथे पुरखा के सुरता, पितर पाख म देहे आशीष बर आथें,घर चलके पांव म। घर दुवारी ल लिप पोत के,फूल सुघर सजायेन पहुना आगे पितर पुरखा,लोटा म पानी मड़ायेन पान तरोइ म दार भात,पानी देहेन हाथ म आथे पुरखा के सुरता, पितर पाख म । पितर पुरखा सगा बरोबर ,चार दिन बर आथें घर अंगना खोर दुवारी, अड़बड़ सुघ्घर भाथे देव असन लागे पुरखा, घर-घर आये गाँव म आथे पुरखा के सुरता, पितर पाख म । आनी बानी के रोटी पिठा, बरा बनाके जेवाथंँन खालिस कहिके पितर पुरखा,मने मन मुसकाथँन हाथ जोड़ के माथ नवाके,गिरबो ऊंकर पाँव म आथे पुरखा के सुरता ,पित…
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