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मुड़सरिया बर जांघी दे आज…मैं सुतवँ नींद भर, छत्तीसगढ़ी कविता, कवि- जोहन भार्गव जी सेंदरी बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ी कविता- बन‌ जा मया के अंजरी, कवि जोहन भार्गव जी।
कविता मैं सीधा छत्तीसगढ़िया अउ का चाही, रचनाकार जोहन भार्गव सेंदरी बिलासपुर
छुवाछुत के ग्यान कविता अनिल कुमार पाली
माटी कोखरो जात नइ पूछे,  सब ल एही माटी म मिलाथे। कवि अनिल कुमार पाली
लोकगीत- तोर मया संग मोर मया के, कवि अनिल जांगड़े
धनहा सबो हरियागे रे-छत्तीसगढ़ी कविता, कवि अनिल जांगड़े जी
कवि अनिल जांगड़े जी की कविता- आथे पुरखा के सुरता