एक नवंबर शुभ दिन…!! आवा भैया आवा बहिनी जुर-मिल जाईन ! एक नवंबर शुभ दिन, इस्थापना दिवस मनाइन !! कई पुरखा मन करिस प्रयास छत्तीसगढ़ बन पाइस अलग राज पुरखा के सुरता म फूल चघाइन ! एक नवंबर शुभ दिन, इस्थापना दिवस मनाइन !! छत्तीसगढ़िया खेल आलंपिक आनी बानी के हमर खेल संस्कृति मल्ल खंभ के कला देखिन देखाइन ! एक नवंबर शुभ दिन, इस्थापना दिवस मनाइन !! हरेली तीजा पोरा कमरछट के तिहार गुड़हा चीला नरियर खुरमी ठेठरी के बहार संगी हीत-मीत घर खाइन अउ खवाइन ! एक नवंबर शुभ दिन, इस्थापना दिवस मनाइन !! हरियर लुगरा म फबय महतारी हाँत म हँसिया पाके धान बाली छत्तीसग…
हस्तिनापुर बर काल के मुँह म…!! अभेद्य व्युह ल सोला बछर म टोर अमाइस अभिमन्यु ! हस्तिनापुर बर काल के मुँह म जा समाइस अभिमन्यु !! पांडव मन के रहिस दुलरुवा कृष्न घलो बड़ प्रेम करयँ एक तो भाँचा अति बहादुर ज्ञान ल जल्दी सिखयँ धरयँ दाई के ओदर म रइ व्युह के भेद ल पाइस अभिमन्यु ! हस्तिनापुर बर काल के मुँह म जा समाइस अभिमन्यु !! कौरव दल के सेनापति द्रोण रचे रहिस व्युहरचना अर्जुन छोड़ के सब पांडव ल फांदा म रहिस फँसना चक्रव्यूह म बड़े ददा बर स्वयं झपाइस अभिमन्यु ! हस्तिनापुर बर काल के मुँह म जा समाइस अभिमन्यु !! चक्रव्यूह के केंद्र बिंदु तक हबरिस …
आगे देवउठनी के दिन…!! आगे देवउठनी के दिन सुमिरबो सिरी हरिहर बिष्नु ! चौमास के पुर गे दिन मनाबो सिरी हरिहर बिष्नु !! कातिक अंजोरी पाख एकादस नींद ले जागयँ भगवान लगिन बिहाव मुंडन, संगे-संग गृह-प्रवेश के बिधान बड़ पबरित ए दिन रिझाबो सिरी हरिहर बिष्नु ! चौमास के पुर गे दिन सुमिरबो सिरी हरिहर बिष्नु !! तुलसी दाई ल सिंगार सजावयँ चुरी महाउर बिंदिया मड़वा बनय कुसियार चघावयँ चुनरी फूल बिछिया हरि संग बिहाव के सुदिन सजाबो सिरी हरिहर बिष्नु ! चौमास के पुर गे दिन सुमिरबो सिरी हरिहर बिष्नु !! सुख उन्नति के देवइया सृष्टि के पालनहार योग शक्ति ले पठोवय हर…
एक फूल महूँ ल खोंच ले फूल गुच्छा कस खोपा म एक फूल महूँ ल खोंच ले…!! गमक जाही हिरदय के गोंदा दमक जाही तन सोच ले…!! लहरा के दहरा नापे बर कोसिस काहे करना आँखी के काजर ले आगर हो के बोहाही झरना ओइ दिन सुरता करबे मोर ले बे नाव वइ रोज ले…! गमक जाही हिरदय के गोंदा दमक जाही तन सोच ले…!! कतको फूल सजा जूरा म मोंगरा चंपा चमेली महिच महीं तोर नजर म झुलिहवँ सुनबे सुनाबे अकेली अमरइया के कोइली ल अमरइया म खोज ले…! गमक जाही हिरदय के गोंदा दमक जाही तन सोच ले…!! कमल पंखुड़ी पुतरी तोर बीच म भौंरा करिया मैं मोर छूए म अति सुहाबे तैं बंसी कनहइया मैं अंग अंग म रा…
प्रेम छुए टमरे के सउख !! प्रेम छुए-टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन !! ये अंग-अंग के सरसरी ए कोनो ल उकसावा झन…!! मिलय देखे म आँखी ल सुख अनछुए सरीर ल छुए म सुध कुवाँरी काया के अंजोर ल फूँक मार के बुतावा झन ! प्रेम छुए टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन !! डुहरु असन फूलव छतनार मन भर बगरय तुहँर नार महमहाय के उमर म एको फूलपान छरियावा झन ! प्रेम छुए-टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन !! दाई-ददा के दुलार हे कर्जा अफ़सर बनव के होय तुहँर चर्चा बिन बिहाव के ए जुड़ाव ले ऊँकर मन कल्लवावा झन ! प्रेम छुए टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन !! कल…
बहुत होगे अब बंद करव…!! मंदिर मस्जिद मठ गुरुद्वारा बहुत होगे अब बंद करव ! धरम के नाव म काटा मारा बहुत होगे अब बंद करव !! राम कहे बर गुनव राम ल मसीह के बंदा गुनव मसीह कबर ल मस्जिद पाछू बनाहा मन बनय मानवता डीह ईश्वर नो हय सिरमिट गारा बहुत होगे अब बंद करव ! धरम के नाव म काटा मारा बहुत होगे अब बंद करव !! अगम अगास ल रचने वाला गली खोल म रइही का बांद छांद के रखबो ओला फेर कहिबो आ आही का अंतस भीतरी झाँका निहाँरा बहुत होगे अब बंद करव मंदिर मस्जिद मठ गुरुद्वारा बहुत होगे अब बंद करव रिश्वत म सिस्टम बेंचागे परमारथ कहाँ दिखही नजर नीयत के अनगढ़ मनखे प्…
माई भाखा के अँचरा…!! माई भाखा के अँचरा, झन संग छोड़व संगवारी…!! घाम छाँव ला गुने कहे बर महिमा एकर भारी…!! दुलौरिन दाई के लोरी दुलार अंतस म समाइस बहिनी भाई कुल सगा समाज के मया दया पाइस ददा के खांद म बइठ के घूमेन मड़इ मेला फूल बारी…! माई भाखा के अँचरा, झन संग छोड़व संगवारी…!! आखर बोली बचन के बिरवा मन के सोभा बढ़ाथे समै बादर म फूलथे फरथे भाव भूख मेटाथे मीठ करू के जानेन सेवाद समझेन दुनियादारी…! माई भाखा के अँचरा, झन संग छोड़व संगवारी…!! इस्कूल कालेज के संगत म आन भाखा ल अधार मिलय डोंहड़ू अकल के फूल कमल कस सुग्घर अउ छतनार बनय जरई, जमीन ले जुरे…
महतारी भासा छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी म लिखबो, छत्तीसगढ़ी ल पढ़बो, छत्तीसगढ़ी ल बउरबो, छत्तीसगढ़ी ल बगराबो अन्य पिछड़ा वर्ग के सर्वेक्षण म अपन महतारी भासा छत्तीसगढ़ी जेन लिखही ओही ह ठेठ छत्तीसगढ़िया होही- छत्तीसगढ़ म अभी के बेरा म सबो कोती अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के सर्वेक्षण फार्म भरवात हे, जेम महतारी भासा के रूप म एक कालम जुडे हे, जेमा छत्तीसगढ़ के जतना छत्तीसगढ़िया भाई मन हे तेन मन ल अपन महतारी भासा के कालम म छत्तीसगढ़ी लिखना हे, जेखर से सरकार तक ये गोठ पंहुंचे के छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़िया मनखे मन अपन महतारी भासा के रूप म छत्तीसगढ़ी भासा ल बउरथे कोनो दू…
लोकमाता अहिल्याबाई…!! तोर महिमा हावय अपार महरानी अहिल्याबाई…!! तैं मनुष रहे के अवतार लोकमाता अहिल्याबाई…!! जनम लेहे एकतीस मई के सन् सत्रह सौ पचीस महाराष्ट्र चौण्डी गाँव के नावँ घलो जागीस भेंड़पाल धनगर गड़रिया मानक शिंदे के घर सुशीला आई के कोख के मान बढ़ाए दुनिया भर तेजस्विनी विलक्षण भक्ति बिक्कट चतुराई…!! तैं मनुष रहे के अवतार लोकमाता अहिल्याबाई…!! आठ बछर म खण्डे राव संग बन गे भाँवर जोग तेईस के उमर म दू लइकन उनतीस म पति बियोग इंदौर किला म जइसे काल हर आँखी गड़ाय रहिस पहिली चुरी फेर ससुर तिहाँ ले बेटा चल बसिस नानकुन अंगना के बेटी जनता के मय…
सामाजिक कुरुति या तो अभिशाप बन जाती है या कठोर नियम दोनों ही स्तिथि में समाज को इसका दुष्प्रभाव झेलना पड़ता है। सभी समाज में समाज को एकजुट करने के लिए कुछ सामाजिक नियम बनाये जाते है, जिससे समाज के लोगों को आपस में जुड़े रहने के लिए प्रेणना मिलती है, परतु कुछ सामाजिक नियम इतने कठोर होते है कि जिसका पालन समाज के हर व्यक्ति के द्वारा नही किया जाता है, इसके साथ ही सामाजिक नियम के आड़ में कुछ लोग समाज के अन्य लोगों का शोषण करने का कार्य करते है, जिससे समाज में जुड़े लोग समाज के प्रति अच्छी भावना नही रख पाते। इन सभी समस्याओं को ध्यान में रख कर सभी स…
पोरा तिहार हमर संस्कारधानी छत्तीसगढ़ जेकर भुइयाँ ह किसम-किसम के तीज-तिहार ले हरियर हावय।इहाँ के जम्मो तिहार के अपन बिसेस महत्ता हावय। इही तीज-तिहार म एक सुग्घर तिहार हे 'पोरा तिहार'। ए परब आंध्रप्रदेश संग महाराष्ट्र म घलो मनाए जाथे जेन ह सांस्कृतिक यात्रा करत हमर छत्तीसगढ़ पहुँचिस।महाराष्ट्र म एला 'पोला पर्व' कहे जाथे पोला माने पोर आना या गर्भ धारण करना अउ हमन एला पोरा कहिथन। पोरा काबर मनाथन ? - हमर तीज-तिहार मन अधिकतर किसानी ले जुरे हुए हावय। पोरा तिहार घलो सीधा खेती-किसानी ले सम्बन्ध राखथे। 'भादो मास के अंधियारी पाख (कृ…
आठे कन्हैया के आठे जोहार हमर राज के जुन्ना अउ लोक परपंरा बड़ सुग्घर हे।जतका सुग्घर हमर परपंरा हे ओतकेच सब ले अलग हे। भगवान कृष्ण के जनम दिन ल हम सबो भारतवासी मन जन्माष्टमी के रुप म बड़ उछाह ले मनावत आवत हन फेर हमर छत्तीसगढ़ म हमन जुन्ना बेरा ले एला आठे तिहार या आठे कन्हैया कहिथन। बदलत बेरा अउ सोशल मीडिया के माध्यम ले जब हम आने संस्कृति अउ आन राज के मनखे ले जुरत हन ता वैचारिक लेन-देन के संग सांस्कृतिक लेन-देन घलो होवत हे अउ हम छत्तीसगढ़िया मन तो अपनेच मूल संस्कृति ल छोड़ के दूसर के धराए संस्कृति, नेंग-जोंग ल सट्ट ले धर लेथन अउ अपन ल ब…
महतारी के मया कमरछठ तिहार महतारी ह अपन लइका के मया अउ लइका के सुग्घर आशीष, सुखी जीवन के खातीर जउँन उपास रहिथे ओला कमरछठ तिहार के नाँव ले जाने जाथे। कतको झन ये तिहार ल हलषट्ठी नाँव ले तको जाने जाथे। हलषट्ठी येखर सेती कहिथे!काबर कि श्री कृष्णा भगवान के बड़े भाई बलराम जी के जनम इही दिन होय रिहिस हे। श्री कृष्णा के बड़े भाई बलराम ह हल ल अपन संगी समझथे अउ अपन संगे- सँग धारण करके चलथे उँखर सेती ये तिहार ल हलषट्ठी नाँव ले जानथे।कमरछठ तिहार के दिन महतारी बहिनी मन अउ जम्मो उपसनिन मन सुग्घर मउँहा डारा के दतवन करथे।अउ गाँव के बिच बस्ती मे जम्मो उपसनिन म…
कमरछठ - दाई दिही आसीस लईका के सुग्घर स्वास्थ बर,दाई रही उपास। छे जात के भाजी संग, खाही पसहर के भात।। नारी जात बर महतारी बने के खुशी ए जग के ओकर सबले बड़का खुशी आए। महतारी नइ बन पाए के दुःख अउ महतारी बने के सुख के अनुभव एक नारी ही कर सकथे। जेन नारी के कोनो लईका नइ राहय ओला बंजर भूइंयाँ कस देखे जाथे।समाज म किसम-किसम के गोठ होथे।ठड़गी बाँझ अउ न जाने का का नाव धरे जाथे। कमरछठ तिहार भादो अंधियारी पाख म छठ के दिन मनाये जाथे। कतको मनखे हा हलषष्ठी ल कमरछठ कहिके संघेर देथे अउ बधाई देथे फेर छत्तीसगढ़ म तो हमन कमरछठ ही मनावत आवत हन…
खुदीराम बोस के भुलाही बलिदान कोन…? करत हाँवव बंदन तोर देसभग्ति भाव ल…! भारत माता बर हारे जिनगी के दाँव ल…!! तीन दिसंबर सन् अट्ठारह सौ नवासी ददा त्रैलोक्यनाथ लक्छमीप्रिया दाई बड़ चमकाए तयँ मिदनापुर गाँव ल…! भारत माता बर हारे जिनगी के दाँव ल…!! पढ़ के नौंवी कक्षा छोड़े आघू के पढ़ाई ल योद्धा बन के लड़े अजादी के लड़ाई ल मुजफ्फरपुर के कांड म उछाले अपन नावँ ल…! भारत माता बर हारे जिनगी के दाँव ल…!! गुलामी ले बढ़ के नोहय रोग कोई जग म कायरता ले बढ़ के पाबे दोष कहाँ जग म बैरी के छाती म धरे बीरता के पाँव ल…! भारत माता बर हारे जिनगी के दाँव ल…!! खुदीर…
सामाजिक सेवा संस्थान…!! करही सिक्षित रोजगरिहा समाज के नव निर्मान…! लोकमाता अहिल्याबाई सामाजिक सेवा संस्थान…!! वादा हावय दुख म संग देबो निरदयी पीरा गरीबी हरबो हर-घर के जन-जन ल बनाही नसामुक्त गुनवान…! लोकमाता अहिल्याबाई सामाजिक सेवा संस्थान…!! अगस्त सन् दू हजार बीस उदार पचास परिवार जुरिस संकल्प हे के तन-मन-धन ले गढ़बो नवा बिहान…! लोकमाता अहिल्याबाई सामाजिक सेवा संस्थान…!! दोखहा कोरोना बिकट पेरिस सल्लग बेवपार धंधा ल टोरिस दू-दी बछर ले पेराएन तभो ले भेजवाइस अनुदान…! लोकमाता अहिल्याबाई सामाजिक सेवा संस्थान…!! हर घर म खुसहाली रहय कोठी दल भरे …
भाई-बहन के प्यार भरे तिहार में बँधेगी धान से बनी राखी, धान कलाकारी के जादूगर चंदू साहू ने बनाया धान से राखी- दुर्ग/ दुर्ग जिले के ग्राम बोरई में रहने वाले चंदू साहू धान से विभिन्न प्रकार के कलाकारी करते हुए छत्तीसगढ़ के गौरव बढ़ाया है, छत्तीसगढ़ के विभिन्न जगहों पर धान कलाकारी का प्रदर्शनी भी लगा चुके है, अलग-अलग जगहों पर चंदू साहू को वर्कशॉप के लिए बुलाये जाते हैं धान से झालर, बैच, देवी जी का श्रृंगार, महिलाओ के लिए ज्वेलरी, साथ ही इन दिनों हाथों से बने हुए धान की पारंपरिक राखी की विभिन्न राज्यों मे बहुत ज्यादा पसन्द किया जा रहा है जिसे ऑर्…
ठग-जग जन के बने हे संघ…!! ठग-जग जन के बने हे संघ…! ईंखर करेजा म भरे प्रपंच…!! रोंठ मनखे…पोठ चंदा डाँड़ के पइसा चलही धंधा कपटी मन के साझा मंच…! ईंखर करेजा म भरे प्रपंच…!! काला-काला मैं धूर्त कहवँ चुप रहिके फेर कतेक सहवँ खून अउँटत हे देख के संग…! ईंकर करेजा म भरे प्रपंच…!! पासा चले बर भारी सुजान एक-दूसर बर खुद ए महान टेटका घिरिया कस बदलयँ रंग…! ईंखर करेजा म भरे प्रपंच…!! पहिली कहिन एक मंच म आबो राजनैतिक लाभ उठाबो अब दुहीं समाज ल रहिके संग…! ईंखर करेजा म भरे प्रपंच…!! नागपंचमी के सुभ दिन म दिखीस जहर हे सब के मन म करिया मन उज्जर बिषदंत…! ईंखर…
एसों के नागपंचमी…!! भगवान नाग देवता तुहँर बिख ल अउ बिखहर करय…!! रोज गोज भरय गोज छूटय अउ चमड़ी ल उज्जर करय…!! जहर के थैली कभू अँटावय झन जल-थल भरे रहय…!! जहर के बत्तीसों दाँत जिनगी के पहात ले जघा म खड़े रहय…!! तुहँर दाँत अउ आँत उम्मर भर अइसने दम दय…!! जेला चाबा ओहर चिटपोट करे बिना उप्पर रेंग दय…!! कहाँ के अस्पताल अउ गुनिया कहाँ के बइगा…!! अत्तेक समये झन मिलय के खुल जाय साँस के फइका…!! बुढ़ापा के बाद फेर एक पइत आरुग लइका हो जावा…!! समाज ल नरक म भेजे बर जुर-मिल के फेर धक्का लगावा…!! समाज जाय भाड़ म नागपंचमी के जोहार भेजव…!! अंतस के जहर ल सल्लग रो…
नगोई में नाले पर किए गए अवैध कब्जे पर चला बुलडोजर, अवैध कब्जा हटते ही फिर शुरू हुआ जल का बहाव बिलासपुर,7 अगस्त 2024/ कलेक्टर अवनीश शरण के निर्देश पर तखतपुर तहसील के ग्राम नगोई में प्राकृतिक नाले को पाटकर जलबहाव बाधित करने और भवन निर्माण को ढहा दिया गया। अवैध कब्जा धारी को 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। अवैध कब्जा हटा दिए जाने से प्राकृतिक जल बहाव पूर्व की तरह बहाल हो गई है। एसडीएम तखतपुर डॉ. ज्योति पटेल ने बताया कि ग्राम नगोई तहसील तखतपुर में लता अग्रवाल पति पंकज अग्रवाल द्वारा ग्राम में प्राकृतिक जल बहाव व नाले को पाटकर ब…
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