आवा भैया आवा बहिनी जुर-मिल जाईन ! एक नवंबर शुभ दिन, इस्थापना दिवस मनाइन -कवि जोहन भार्गव जी
अभेद्य व्युह ल सोला बछर म टोर अमाइस अभिमन्यु ! हस्तिनापुर बर काल के मुँह म जा समाइस अभिमन्यु !!- छत्तीसगढ़ी कविता- कवि- जोहन भार्गव जी।
छत्तीसगढ़ी कविता - आगे देवउठनी के दिन सुमिरबो सिरी हरिहर बिष्नु- जोहन भार्गव जी
छत्तीसगढ़ी कविता- फूल गुच्छा कस खोपा म एक फूल महूँ ल खोंच लेकवि- जोहन भार्गव जी सेंदरी बिलासपुर (छ.ग)
छत्तीसगढ़ी कविता- प्रेम छुए-टमरे के सउख, मिलभेंट करे बर जावा झन - कवि-  जोहन भार्गव जी सेंदरी बिलासपुर (छ.ग)
बहुत होगे अब बंद करव ! धरम के नाव म काटा मारा बहुत होगे अब बंद करव,मंदिर मस्जिद मठ गुरुद्वारा-  कवि- जोहन भार्गव जी सेंदरी बिलासपुर (छ.ग)
माई भाखा के अँचरा, झन संग छोड़व संगवारी…!! घाम छाँव ला गुने कहे बर महिमा एकर भारी…कवि- जोहन भार्गव सेंदरी जी बिलासपुर (छ.ग)
अन्य पिछड़ा वर्ग के सर्वेक्षण म अपन महतारी भासा छत्तीसगढ़ी जेन लिखही ओही ह ठेठ छत्तीसगढ़िया होही-
छत्तीसगढ़ी कविता- लोकमाता अहिल्याबाई,  कवि - जोहन भार्गव जी गाँव - सेंदरी जिला - बिलासपुर (छ.ग)
सामाजिक कुरुति या तो अभिशाप बन जाती है या कठोर नियम दोनों ही स्तिथि में समाज को इसका दुष्प्रभाव झेलना पड़ता है।
हमर संस्कारधानी छत्तीसगढ़ जेकर भुइयाँ म सुग्घर तिहार हे 'पोरा तिहार'
   आठे तिहार हमर जुन्ना परंपरा,हमर कला के सुग्घर चिन्हारी आए- आठे कन्हैया के आठे जोहार,  लिखइया - नागेश कुमार वर्मा  टिकरापारा रायपुर
महतारी के मया कमरछठ तिहार- छत्तीसगढ़ के कमरछठ तिहार
कमरछठ - दाई दिही आसीस     लईका के सुग्घर स्वास्थ बर,दाई रही उपास।  छे जात के भाजी संग, खाही पसहर के भात।।
करत हाँवव बंदन तोर देसभग्ति भाव ल, खुदीराम बोस के भुलाही बलिदान कोन…? कवि- जोहन भार्गव जी   गड़रिया समाज सेंदरी बिलासपुर ।
करही सिक्षित रोजगरिहा समाज के नव निर्मान…!  लोकमाता अहिल्याबाई सामाजिक सेवा संस्थान…!!
भाई-बहन के प्यार भरे तिहार में बँधेगी धान से बनी राखी, धान कलाकारी के जादूगर चंदू साहू ने बनाया धान से राखी-
ठग-जग जन के बने हे संघ…!  ईंखर करेजा म भरे प्रपंच- कवि- जोहन भार्गव जी  गड़रिया समाज सेंदरी बिलासपुर|
छत्तीसगढ़ी कविता-एसों के नागपंचमी, कवि जोहन भार्गव जी की कविता।
नगोई में नाले पर किए गए अवैध कब्जे पर चला बुलडोजर, अवैध कब्जा हटते ही फिर शुरू हुआ जल का बहाव